Wo Barsat Ki Haseen Sham- Part 2-वो बरसात की हसीन शाम-2

By | December 7, 2018
Wo Barsat Ki Haseen Sham- Part 2

Wo Barsat Ki Haseen Sham- Part 2

Wo Barsat Ki Haseen Sham- Part 1

आपने जाना कि मेरे मोहल्ले की शादीशुदा हॉट गर्ल जुली को हम तीन दोस्तों ने चुदाई के लिए राजी कर लिया था. बस वो थोड़े नखरे दिखा रही थी.
अब आगे …

मैं जुली के पेट को किस करने लगा और उसकी योनि को कपड़े के ऊपर से किस बाईट करना शुरू किया. अब तक वो भी मादक सिसकारियां भरने लगी थी. फिर भी दिखावे के लिए छटपटा रही थी और बोल रही थी- ये गलत है, सोहेल मुझे नहीं छोड़ेगा.
यह सुनते ही पुलिस वाले दोस्त विजय बोला- डर मत … सोहेल ने कुछ किया तो मैं हूँ ना. मैं देखता हूँ. तू सिर्फ हमारा साथ दे, कुछ नहीं होगा … आज तू भी मजे ले ले.
अब जुली को समझ आ गया था कि शायद हम उसे नहीं छोड़ेंगे, तब बोली- जीजू जो भी करना है आहिस्ता और प्यार से करो, सोहेल जैसा दर्द मत दो … और तुम तीन लोग करोगे तो मेरा क्या होगा … सोचो ना प्लीज.

उसके मुँह से ये सुनते ही हम सबके लंड हिनहिनाने लगे. वाह और लंड को क्या चाहिए था अब … नेकी और पूछ पूछ … जिसकी चुदाई के सपने देखते थे, वो हमारे सामने चूत देने को राजी हो गई थी.
ये सुनते ही अमित बोला- अरे तू ऐसी है कम से कम दस बार चोदने के बाद भी तेरा जादू बढ़ता ही रहेगा, तू डर मत.
पायल- प्लीज ऐसी बात मत करो ना, दस बार से तो मेरी हालत खराब हो जायेगी, मेरे बारे में भी सोचो ना. जीजू प्लीज आप ही समझाओ ना. प्लीज जीजू मेरी हालत बुरी मत करना, मुझे चलने फिरने के काबिल तो छोड़ो … और प्लीज पहले आप करो, जो भी करना है.

ये सुनते ही मैंने उसके चेहरे को पकड़ कर उसके टमाटर जैसे गालों को चुम्मी करना, काटना शुरू कर दिया और होंठों पे होंठ रख के फ्रेंच किसिंग शुरू कर दी. अमित ने पीछे से पीठ को, गले को गांड को चूमना शुरू किया. विजय उसकी योनि को चाटने लगा.

अमित ने पीछे से दांतों से उस ड्रेस की नॉट को निकाला और वो ड्रेस निकल गई. उसका वो मादक बदन देख के मैं तो देखता ही रह गया. क्या संगेमरमर जैसा बदन था, बदन पे लाल ब्रा खूब जंच रही थी. वो उसकी ब्रा भी सिर्फ निप्पलों ही मुश्किल से ढक पा रही थी, उसके बड़े बड़े मम्मे उछल रहे थे.

वो देख कर मेरे पहले विजय ने ही उसकी ब्रा खींच कर निकाली और दूर फेंक दी. विजय ने इतनी जोर से ब्रा खींची थी कि उसकी ब्रा के दो टुकड़े हो गए और हुक्स बिखर गए. ब्रा हटते ही विजय जुली के मम्मों पे टूट पड़ा. वो जुली का एक चूचा अपने हाथों से रगड़ने लगा और दूसरा मुँह में लेकर खाने लगा.

मैंने ऊपर का मोर्चा संभाला. उसके होंठों का रसपान फिर से शुरू किया. मैंने पहले उसके ऊपर का होंठ चूसना शुरू किया, फिर नीचे का होंठ अपने होंठों में दबा आकर हल्का सा चुभलाने लगा. उसका मुँह खुला तो मैं अपनी जुबान उसके मुँह में अन्दर तक डाल कर फिराने लगा.
मेरी जुबान उसकी जुबान पर चलने लगी थी. उसको भी मजा आने लगा था.

फिर मैंने दोनों होंठ उसके मुँह में अन्दर डालकर उसके रस को पीना शुरू कर दिया. मैं पूरी ताकत से उसके होंठ अपने होंठों से लगा कर चूमने का मजा ले रहा था. मैंने उसकी जुबान मेरे होंठों से खींच कर अपने मुँह में ले ली और उसकी जुबान को चूसना शुरू कर दिया.

उसकी जुबान एकदम गुलाबी मुलायम थी, मैं उसे दांतों से हल्का रगड़ने लगा, जोर जोर से चूसने लगा. वो भी मेरी जुबान से खेलने लगी. तभी नीचे अमित ने उसकी चड्डी खींच कर फेंक दी थी. देखा तो उसकी चूत इतनी नाजुक और मुलायम और शेव की हुई थी कि लंड की माँ चुद गई.

उसके होंठों जैसे ही सुंदर नाजुक चूत पर अमित टूट पड़ा. वो अपनी जुबान से चूत सहलाने लगा. तो जुली सिसकारियां लेने लगी. अमित धीरे धीरे अन्दर जुली की चूत में अपनी जुबान डालने लगा और जुली की चूत के अन्दर उसकी यौनमणि को उसने अपने होंठों में पकड़ कर कसके होंठों से मींजते हुए खींचा तो वो मीठे दर्द से चिल्ला उठी.

उधर विजय जो उसके मम्मे चूस रहा था, जुली उसके बाल नोंचने लगी. जुली के मम्मे इतने बड़े थे कि विजय के हाथ में और मुँह में समा ही नहीं रहे थे.

जुली मेरे बदन में नाखून घुसाने लगी, मेरे होंठों को दांतों से काटने लगी, तभी उसकी योनि चाटते हुए अमित उल्टा फिर गया और अपना लंड उसके मुँह में डालने लगा. अमित का लंड सात-आठ इंच का लम्बा और बहुत ही मोटा व झांटों से भरा हुआ था.
ये देखते ही वो चिल्लाने लगी- छी: कितना गंदा है ये, बदबू है इसमें, ये में बिल्कुल नहीं करूँगी, मुझे नहीं करना … प्लीज जीजू रोको इनको.
अमित अपना लंड जुली के मुँह में डालने की कोशिश करने लगा.

तभी जुली कलपते हुए बोली- मैं पहले जीजू का लंड लूंगी.
यह सुन कर मैं आगे आया. मेरा लंड छह इंच का गोरा और शेव किया हुआ साफ सुथरा रहता है. अपने चिकने लंड को मैं उसके मुँह में डालने लगा और 69 में आके उसकी चूत को चाटने लगा. जैसे ही मैं जुली की चूत को अन्दर तक चाटता, वैसे वो मेरे लंड को चूसने लगती, मुँह में ले कर अन्दर बाहर करने लगती. वो मेरे लंड की टोपी को पीछे करके सुपारे को चाटने लगी, लंड को होंठों में दबा कर हल्का सा बाईट करने लगी. मैं उसकी चुत में अन्दर तक चाटने लगा और कुछ ही देर में उसने अपनी चूत से पानी छोड़ दिया.

इसी बीच अमित अपना एक और पैग खत्म करके आ गया और बोला- अब मैं इस गजब माल को चोदता हूँ.
वो जुली के पीछे आ गया … जुली नीचे बैठ कर मेरे लंड को कैंडी की तरह चूस रही थी. मैं उसके मुँह को चोद रहा था. विजय उधर खड़ा होकर जुली को मेरा लंड चूसते हुए देख रहा था, साथ ही पैग लेते हुए वो मुठ भी मारने लगा था.

अमित अपना लंड जुली की पीठ पे फिराने लगा … उसके चूतड़ों को मसलने लगा. फिर अमित जुली के चूतड़ों को किस और बाईट करने लगा. उसके चूतड़ों पर नीट शराब डाल कर चाटने लगा. उसके नाजुक गोरे चूतड़ों पर अमित के दांतों के निशान बन गए.

तभी मैं झड़ने लगा, मैं बोला- जुली मेरा पानी निकलने वाला है.
लेकिन जुली मेरे लंड को चूसती ही रही और मैंने सब पानी उसके मुँह में ही छोड़ दिया. उसने बड़े मजे से मेरे लंड के रस को निगल लिया और फिर से चूसना चालू रखा. इससे मेरा लंड पांच मिनट में ही फिर से तन गया.

अब मैंने और अमित ने उसे उठा के खड़ा किया. जुली ने मेरे बदन को, कंधे को, चेस्ट को किस करना और काटना शुरू किया. जुली ने अपनी चूत मेरे लंड के सामने खोल दी. उसने अमित के लंड को दरकिनार कर दिया, वो बोली- पहले जीजू का अन्दर जाएगा.
यह सुनकर अमित की खोपड़ी भन्ना गई, लेकिन मैंने अमित को इशारे से समझा दिया कि लौंडिया किधर जाएगी, साली को पूरी रात चोदेंगे.

अब मैंने अपना लंड जुली के चुत में फिट कर दिया और पीछे अमित ने जुली की गांड के छेद पे अपना लंड रख दिया. हम दोनों ने जुली की चुदाई का काम शुरू किया. मैंने लंड फंसा कर अमित को आँख मारी तो अमित ने जुली की गांड में लंड का झटका लगा दिया. जुली जोर से चिल्लायी. उसके छटपटाहट से लंड अन्दर नहीं जा रहा था.

मैंने पास रखी मेरी केवाई जैली उसे दे दी. उसने जैली को लंड पे लगाया और मैंने भी फिर से काम शुरू किया. हल्के हल्के धक्के देना शुरू किए, लेकिन अमित जोर जोर से धक्का देने लगा … तो जुली चिल्लाने लगी थी, वो छटपटा रही थी.

तभी अमित ने इतना जोर का झटका दिया कि उसका लंड जुली की गांड को फाड़ता हुआ अन्दर चला गया. दर्द के मारे जुली जोर से चिल्ला उठी. मैंने अपने होंठों से उसका मुँह बंद किया और झटके से अपना भी लंड अन्दर डाल दिया. थोड़ी देर के दर्द के बाद जुली भी दोनों छेदों में लंड का मजा लेने लगी.

उसने बताया कि सोहेल ने उसकी गांड को खूब बजाया था, इसलिए उसका पिछवाड़ा खुला है. लेकिन दोनों तरफ से लंड पहली बार घुसा है तो दर्द हुआ था.

कुछ ही देर में रूम कामुक आवाजों से भर गया था. जुली मजा ले रही थी- आहह जीजू मजा आ रहा है … और अन्दर तक करो ना … आह … जोर से करो … आहह अमित साले दर्द मत दो … आहहहह प्लीज … उई माँ …
थोड़ी देर बाद अमित झड़ गया और बाजू में जा के नशे में टुन्न हो कर गिर गया और मैं जुली की चूत को चोदता ही रहा. इतने में जुली ने दो बार पानी छोड़ा और फिर मैंने भी अपना वीर्यदान जुली को कर दिया और हम दोनों थक कर गिर गए.

जुली के बदन पे एक भी पॉइंट ऐसा नहीं था, जहां हमने किस या बाईट ना किया हो. उसकी जवानी का और बदन का पूरा लुत्फ़ उठाया.

तभी हाथ में ग्लास लिए विजय आया और जुली को बांहों में लेने लगा, जुली की तो जान निकल गयी थी. विजय ने अपना ग्लास जुली के होंठों से लगा के पिला दिया … जुली एकदम से उठ गयी और थूकने लगी, बोली- ये क्या पिला दिया, इसमें कतरा सा क्या मिलाया है?
विजय हंसने लगा, मैंने देखा था विजय ने मुठ मार के अपना वीर्य दारू में मिक्स करके जुली को पिला दिया था.

कुछ ही देर में विजय ने दूसरा पैग भी जुली को पिला दिया. जिससे जुली के मुँह का स्वाद ठीक हो गया और उसको नशा छा गया. तभी विजय ने अपना लंड जुली के मुँह में डाल दिया, इस वक्त जुली एकदम चुदासी हो गई थी, उसको नशे में कुछ नहीं सूझ रहा था. वो विजय के लंड को चूसने चाटने लगी.

विजय का लंड बहुत ही बड़ा था, जुली के मुँह में पूरा जा ही नहीं रहा था, जुली साँस ही नहीं ले पा रही थी. यह देख के जुली बोली- विजय सर, मेरी हालत बहुत खराब है … मैं चल भी नहीं पा रही हूँ और आपका ये मूसल लंड मेरी चूत फाड़ देगा … प्लीज आप मत करो ना.

यह सुनकर विजय ने बोतल में बची हुई शराब जुली के मुँह में लगा कर उसे नीट ही पिला दी. अब जैसे जुली को जैसे ही नशा चढ़ा और उसे दिखना बंद हुआ तो विजय ने उसे हल्के हल्के से चोदना शुरू कर दिया. जुली की सिर्फ ‘आह … उह्ह …’ की आवाजें आ रही थीं. वो मस्ती में बके जा रही थी- ओ प्लीज … आहाहह हहह … उम्म्ह… अहह… हय… याह… नो … अब बस भी करो … ऊयी माँ … उंउऊ … आहहहह … बहुत बड़ा है … मुझसे सहा नहीं जा रहा विजय सर बस करो ना … मेरी चूत फाड़ ही दोगे क्या? प्लीज़ जानवर मत बनो ना … मुझ पर रहम करो … इहह … आहाहह … जीजू कहां हो? प्लीज अब बस भी कर दो.

लेकिन विजय ने एक नहीं सुनी और वो उसे चोदता ही रहा. बाद में वो झड़ कर जुली के ऊपर ही ढेर हो गया. उसके बाद फिर एक बार अमित ने जुली के मुँह में लंड डालने की ख्वाहिश पूरी कर ली, उसके मुँह में अपने झांट युक्त लंड डाल ही दिया. अमित ने जुली को उठा के सोफे पे बिठा दिया और सर पकड़ के उसके मुँह में लंड अन्दर बाहर करने लगा. वो उसके बालों को जोर जोर से ऊपर खींच कर लंड को और अन्दर डालने लगा. जुली के मुँह में जोर जोर से धक्के देने लगा. अमित का लंड जुली के मुँह में अन्दर तक चला गया. उसके लंड की टोपी पूरी पीछे करके सुपारा जुली के दांतों पे जुबान पे रगड़ने लगा. मेरे बालों को नोंचने और खींचने के बाद दोनों गाल बाहर से पकड़ कर लंड पर पकड़ जमा ली और जुली का मुँह आगे पीछे करने लगा.

जुली कुछ भी रिएक्ट नहीं हो रही थी. बाद में लंड बाहर निकाल कर लंड पे शराब डाली और फिर मुँह में ठूंस दिया. इस बार वो इतनी जोर से जुली का मुँह चोदने लगा कि जुली आहें भरने लगी. उसकी ‘आ …आं …’ की आवाज आने लगी.

जुली की हालत सच में बहुत बुरी हो चली थी. मगर वो कुछ भी कर नहीं सकती थी. फिर कुछ देर बाद अमित ने अपने लंड का पूरा पानी जुली के मुँह में डाल दिया. जुली का मुँह वीर्य से भर गया. जुली ने वो बाहर थूक दिया. इस मुखचोदन में जुली के रेशमी बालों पे, गालों पे, लगभग सारे बदन पर ही अमित ने अपना वीर्य गिराया था … इतनी भारी मात्रा में वीर्यपात हुआ था.

अमित झड़ने के बाद भी शांत नहीं हुआ था. वो एक बार फिर से जुली के मम्मों को मसलने लगा और उसके निप्पलों को मरोड़ने लगा. वो आटे की तरह मम्मों को गूँथ रहा था. फिर उसने जुली के एक मम्मे को अपने मुँह में खींचा तो उसका पूरा चूचा तो मुँह में समा ही नहीं रहा था. अमित जुली के मम्मे को आम समझ कर उसका रसपान करने लगा … और चूसते हुए मसलने लगा.

जुली सिर्फ ‘आह आं …’ करती रही, अपनी छाती जुली के मुँह पे रखके अमित अपने सीने के निप्पलों को जुली के होंठों से किस करवाने लगा. साथ ही जुली की बांहों को काटने लगा.

इतना गर्म सीन देख कर हम दोनों भी पास ही आ गए. हम दोनों ने जुली के दोनों हाथ कसके ऊपर उठा लिए और उसकी बगलों के बीच में मुँह डाल कर उसको चाटने लगे. उसकी बगलें उसके गालों की तरह मुलायम और गोरी चिट्टी थीं, उनमें एक भी बाल या बाल के निशान नहीं थे.

ये देख कर एक बाजू विजय और दूसरी में मैं उसकी बांहों को किस करने लगे और उत्तेजना बढ़ने पर उसे काटने लगे. हम दोनों बड़ी बेताबी से अपनी जीभ फेरने लगे. इससे जुली मचलने लगी.

अमित ने अब खुद के सीने को जुली के मुँह से निकालकर फिर अपना तना हुआ मोटा काला लंड उसकी चुत पे सैट करके हैवानों जैसे जोर से अन्दर धकेलने लगा.

इधर मैं और विजय पागलों के जैसे जुली के गले को, कंधों को, बांहों को, बगलों को, पीठ को, जांघों पर किस करते रहे. हम दोनों अपनी जीभों और दांतों से उसके बदन का मर्दन करते रहे.

इतने में अमित ने बेरहमी से अपना पूरा लंड जुली की चुत के अन्दर डाल दिया. इतनी थकी हालत में भी जुली दर्द से जोर से चीख उठी. उधर अमित भी इतनी जोर से चुदाई करने लगा कि सोफा हिलने लगा.
जब अमित अपने लंड को बाहर निकालता तो जुली एकदम से ऊपर को उठ जाती और जब अन्दर तक डालता, तब नीचे गिरके अमित के भारी भराकम शरीर के नीचे दब जाती.

जुली की पूरी चुत यूं समझो कि अमित ने फाड़ ही दी और अंत में अपना माल गिरा कर जुली की साईड में गिर कर ढेर हो गया.

कुछ देर बाद अमित और विजय चले गए. उसने जाने के थोड़ी देर बाद मैं जुली को अपनी बांहों में उठा कर बेडरूम में ले गया. उसे चला भी नहीं जा रहा था. मेरी बांहों में बांहें डाल कर वो परी सो गयी.

सुबह जब जुली की आंख खुली तो उसने मुझे जगाया. उसका पूरा बदन दर्द कर रहा था. बेचारी के मुँह में और चुत में तीन बार, पीछे से एक बार ठुकाई के बाद जान निकल गयी थी.

मैंने उसे हल्का मसाज दिया और फिर दोनों एक साथ नहाये और वो तैयार हो गयी. मगर उसे चलने में प्रॉब्लम हो रही थी.

मैंने जुली को दिल से थैंक्स बोला और उसने भी मुझे कसके हग करके लिपलॉक करते हुए एक लम्बा किस दिया.
फिर वो बोली- जीजू फिर कब मिलोगे?
मैंने बोला- तुम फिर कब आओगी? शाम को फिर आओ ना …!
वो हंस के बोली- आई विल ट्राय बट जीजू … तुम अकेले ही रहना, मैं सिर्फ आप के लिए आऊंगी.
मैंने उसे चूम कर हां कह दिया.

वो सच में शाम को आ गयी और हम दोनों ने अलग अंदाज में एंजॉय किया.

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