Mere Pati Ko Meri Khuli Chunoti- Part-6

By | December 3, 2018
Mere Pati Ko Meri Khuli Chunoti- Part-6

Mere Pati Ko Meri Khuli Chunoti- Part-6

Mere Pati Ko Meri Khuli Chunoti – Episode 5

मुझे मनीष अपनी आप बीती सुना चूका था और शायद अब बारी मेरी थी. मनीष मेरी और देखने लगा।

मैंने कहा, “औरत और मर्द मिलते हैं ना? जब उनके लिंग मिलते हैं ना? तो उसे मैटिंग कहते हैं?”

मनीष ने कहा, “ओह, तुम्हारा मतलब है मैटिंग का मतलब है चुदाई करना।” मनीष की बात सुनकर मैं थोड़ा सा सहम गयी। मैंने उम्मीद नहीं की थी मनीष ऐसी बात कहेंगे।

मैं थोड़ी हैरानगी से मनीष की और देखने लगी। मेरी चूत में कुछ कुछ खुजली सी होने लगी और रस रिसना शुरू हो गया। मेरी निप्पलोँ में भी कुछ कुछ होने लगा। धीरे धीरे मेरी निप्पलें फुलने लगीं।

मैंने मनीष से कहा, “मेरे भड़वे पति ने भी मेरे साथ भी वही किया जो तुम्हारी बीबी ने तुम्हारे साथ किया। साला कुत्ता! अरे कुत्ता तो वफादार होता है। वह तो कुत्ता से भी बदतर है।” मैंने चंद शब्दों में ही मेरी कहानी कह डाली। मैंने भी ऐसा कह कर मेरे मन की भड़ास निकाली।

पर अब मुझे मनीष के बारे में सोचना था। वह तो मेरे घर आकर बैठ गया था। हालांकि उसका दर्द गहरा था फिर भी ऐसे बिन बुलाये आ जाना मुझे जँचा नहीं।

मैं अपने मन में सोच रही थी, यह जनाब कब जाएंगे? जाएंगे भी या नहीं? मैं मनीष को ज्यादा पसंद नहीं करती थी। मुझे उसका देहाती रवैया वैसे भाता नहीं था, पर हाँ उसका यह खुरदरा पन और कर्कश बर्ताव मेरे जहन में कुछ अजीब सी हलचल पैदा करता था, जिससे मेरी उससे चुदाई करने की इच्छा प्रबल हो जाती थी।

मेरा दिमाग कह रहा था की मनीष चला जाए और मन कह रहा था की मनीष रुक जाए और मुझ पर जबरदस्ती करे और मुझे चोदे।

मैंने कहा, “मनीष यह बात ठीक नहीं है। तुम ऐसे शब्दों का प्रयोग मत करो। मुझे अच्छा नहीं लगता।”

मनीष ने मेरी और देख कर कहा, “क्यों, इस में क्या बुराई है? क्या तुम अपने पति के साथ चुदाई नहीं करवाती हो? क्या वह तुम्हें चोदता नहीं है? हाँ इसी बात को तुम यह कह देती हो की हम सेक्स करते हैं। भला सेक्स कहीं किया जाता है क्या? सेक्स का मतलब है जातीयता। सेक्स नाम है, क्रिया नहीं। इंग्लिश में ही बोलना है तो फकिंग कहो। घुमा फिरा कर बात करना हमें आता नहीं। अगर चोदना है तो साफ़ साफ़ बोलो की चोदना है। क्यों ठीक है ना?” मनीष ने मेरी और देखा और बोला।

हालाँकि मनीष की बात सच थी। पर उस समय के लिहाज से और मेरी उधेङबुन वाली मानसिकता के कारण मैं उसे आसानी से झेल नहीं पा रही थी। मनीष के व्यक्तित्व में खेतों की मिटटी वाली मर्दाना खुशबू थी। वह सख्त और अनाड़ी था तो फिर सुडौल और आकर्षक भी था।

मैं चुप रही। मनीष ने कहा, “फिर तुमने तुम्हारे पति से पूछा की वह किसे चोद रहा था?”

मैंने कहा, “मनीष मैं दुबारा कहती हूँ की ऐसी भाषा मत बोलो। यह सभ्यता वाली बात नहीं है।”

मनीष ने कहा, “चलो भाई सॉरी। आगे अपनी बात चालु रखो।”

मैंने कहा, “उस समय तो मेरे पति ने लाइन काट दी। उसके बाद ना तो मैंने मेरे पति को फ़ोन किया ना ही साले मेर पति ने। बाद में जब वह घर आया तो मैंने उनके आते ही उसको आड़े हाथों लिया। हमारी काफी बहस हुई। आखिर में उसने माना की वह एक सेक्रेटरी को रात को होटल में बुलाकर चोद रहा था।”

अचानक मेरे मुंह से “चोदना” शब्द निकल गया, तो मनीष ताली बजाते हुए खड़ा हो गया और बोला, “यह हुई ना बात?”

मैं पकड़ी गयी तो एकदम शर्मा गयी। लज्जा से मेरा चेहरा लाल हो गया। मैं रँगे हाथोँ पकड़ी गयी। मेरी मनोदशा मनीष जान गए। चेहरे पर लज्जा देख कर मनीष बोला, “बड़ी सभ्य बन रही थी ना? अब “चोदना” बोल पड़ी ना? इसमें शर्माना क्या? जो हकीकत थी वही तुमने बोली है।” मैं मनीष की बात का जवाब ना दे पायी।

मैंने मनीष से कहा, “मनीष अब काफी रात हो चुकी है। क्यों ना हम कल सुबह बात करें?”

मनीष ने मेरी और आश्चर्य से देख कर कहा, “क्यों? अभी तो रात बहुत बाकी है। अभी तो सिर्फ ग्यारह बजे हैं। हम तो सुबह तक बात कर सकते हैं।“

मैंने कहा, “तुम भी थक गए होंगे। मैं भी थक गयी हूँ। क्यों ना हम इस बात को आज के लिए ख़त्म करें? कल फिर मिलेंगे। वैसे भी तुम्हें इतनी रात गए फिर टैक्सी भी मुश्किल से ही मिलेगी।”

मनीष ने मेरी और देखते हुए टेढ़े सुर में कहा, “हाँ इतनी रात गए टैक्सी कहाँ मिलेगी? मैं रात को यहीं रुक जाता हूँ। तुम्हारी पूरी बात सुनूंगा और मेरी बात कहूंगा। फिर सुबह जल्दी ही मैं चला जाऊंगा जिससे मुझे कोई देख ना पाए।” बात बात में ही मनीष ने मेरी दुखती रग दबा दी।

अब मैं मनीष को कैसे कहूं की “गेट आउट?” मैंने अपने आपको लाचार पाया। मेरी उलझन देख कर मनीष सामने आया और बोला, “क्यों परेशान हो रही हो? देखो प्रिया। तुम्हारी और मेरी कहानी एक जैसी है। मैं सच कहूं तो तुम्हें तुम्हारी चूत चोदने के लिए कोई अच्छा मोटा लण्ड चाहिए, और मेरे इस मोटे लम्बे लण्ड को एक अच्छी प्यारी चूत चाहिए। अब दोनों के पास जो एक दूसरे को चाहिए वह है तो फिर क्या प्रॉब्लम है?”

मनीष मेरी और आगे बढ़ा और मुझे खिंच कर कस के अपनी बाँहों में ले लिया। मैंने उसका हाथ हटा ने की कोशिश की पर मेरी एक ना चली।

मैंने मनीष से कहा, “मनीष तुम यह क्या कर रहे हो? मुझे छोड़ दो।”

मनीष ने कहा, “मुझे छोड़ दो नहीं, बोलो मुझे चोद दो।” मनीष ने मुझे अपनी बाँहों इतना कस के पकड़ा की मेरी “फैं” निकल गयी। उसने आसानी से मुझे अपनी बाहों में पकड़ कर ऊपर की और उठाया। वह खुद कुर्सी पर बैठ गए और मुझे अपनी गोद में बिठाया। मैं बेचारी मनीष का मुकाबला कहाँ कर सकती थी?

मैंने मनीष से कहा, “मनीष यह तुम क्या कर रहे हो? यह ठीक नहीं है। मुझे छोड़ दो।”

मनीष ने कहा, “फिर वही छोड़ दो? मैं तुम्हें छोडूंगा नहीं, मैं तुम्हें चोदुँगा। तुम भी तो यही चाहती हो ना?”

मनीष ने मेरे मन की बात कैसे समझ ली यह मैं नहीं जानती? पर यह सच था की मैं भी मनीष की खुरदरी और कर्कश भाषा से ज्यादा उत्तेजि हो रही थी।

मैं चाहती थी की उस रात मनीष मुझे ऐसे गालियाँ और गन्दी भाषा का प्रयोग करे और ऐसे चोदे जैसे मैं अपनी जिंदगी में कभी नहीं चुदी।

मैंने कई देसी पोर्न वेब साइट में मर्दों को औरतों को गालियां और अपमान जनक शब्द प्रयोग करते हुए चोदते हुए देखा और पढ़ा था। इससे मैं उत्तेजित हो जाती थी और ऐसा कभी मेरे साथ भी हो यह सोचकर कल्पना में खो जाती थी।

उस समय मेरी जाँघों के बिच में से इतना रस झरने लगता था और मेरी निप्पलेँ ऐसी फूल जाती थीं की मैं नहीं बता सकती।

मेरे पके स्तनों और फूली हुई निप्पलोँ का स्पर्श मनीष को पागल कर रहा था। मुझे इतने कस के बदन से चिपका ने के कारण जब मनीष के पुरे बदन में कम्पन हुई सो मैंने भी महसूस की। मैंने देखा की मनीष मेरे स्तनोँ को घूर घूर कर देख रहा था।

पतले गीले कपडे में से मेरे स्तन उसे साफ़ साफ़ दिख रहे होंगे। जरूर मेरी फूली हुई निप्पलेँ मेरे हाल की चुगली कर रही होंगीं। मैंने मेरे बदन में महसूस किया की मनीष का लण्ड फुलता जा रहा था जो की मेरे जाँघों के बिच टक्कर मार रहा था। उसकी आँखों में कामुकता का पागलपन था जो साफ़ साफ़ संकेत दे रहा था की वह मुझे चोदे बगैर छोड़ेगा नहीं।

मनीष ने मेरी चिबुक अपनी उँगलियों में पकड़ी और मेरी गर्दन ऊपर की मेरी आँखों में आँखें डाल कर बोला, “मेरी बीबी मेरे भाई के लण्ड से खुश है और उससे चुदवा रही है। तुम्हारा पति उसकी सेक्रेटरी की चूत से खुश है और उसे चोद रहा है। फिर ऐसा करते हुए भला हमें अपने आपको दोषी क्यों समझना चाहिए? मैं और तुम क्यों ना एक दूसरे को चोद कर अपनी वासना की पूर्ति करें और उन सब को दिखा दें की हम भी कुछ कम नहीं।”

मैंने मनीष से कहा, “वह सब छोडो और आप यहां से जाओ। देखो, यह ठीक नहीं है। मैं एक शादी शुदा औरत हूँ और तुम भी तो शादी शुदा हो?”

“क्या मेरी बीबी शादी शुदा नहीं है? क्या तुम्हारा पति शादी शुदा नहीं है? फिर वह क्यों दूसरे की चुदाई करने में लगे हुए हैं? क्या यह कानून तुम पर और मुझ पर ही लागू होता है? उन पर नहीं होता?” मनीष ने मुझे पूछा।

मैंने कहा, “मैं यह सब नहीं जानती। पर तुम कुछ भी ऐसा नहीं करोगे बस, मैंने कह दिया तो कह दिया।”

तब मैंने मनीष के चेहरे पर निराशा का भाव देखा। मैं मेरे दिल और दिमाग के बिच हो रहे संघर्ष से परेशान थी।

मैंने अपनी नज़रे झुका दी। मनीष ने फिर मेरी ठुड्डी पकड़ कर ऊपर उठायी और आँखों में आँखें डाल कर बोला, “दीक्षा मैं जानता हूँ तुम मेरे लण्ड के लिए तरस रही हो। आज इसी लिए मैंने तुम्हें फ़ोन नहीं किया और तुम्हारे घर में घुस आया ताकि तुम्हें ना बोलने का मौक़ा नहीं मिले. क्यूंकि मैं जानता था की तुम्हारी इच्छा क्या है। पर मैं तुमपर कोई जबरदस्ती नहीं करना चाहता। में तुम्हारे मुंह से “हाँ या ना” सुनना चाहता हूँ। बोलो हाँ या ना?”

मैंने मनीष की आँखों में आँखें मिलाई और फिर अपनी गर्दन झुका दी और कुछ नहीं बोली। मैंने सोचा मेरे नजरें झुकाने से मनीष समझ जाएगा की मुझे उससे चुदवाने में कोई आपत्ति नहीं थी। पर मुझे लगा मनीष मेरे मुंह से हाँ कहलवाना चाहता था। मैं भी तो भारतीय नारी थी। मैं अपने मुंह से कहाँ हाँ कहने वाली थी?

मनीष ने फिर मेरी गर्दन ऊपर की और उठाई और मेरी और तीखी नजर से जब देखा तो मैंने कहा, “अरे छोडो भी। मैं क्यों हाँ कहूं? तुमने मुझे कोई रोड छाप वेश्या समझ रखा है? मेरी और ऐसी नजर से ना देखो। और दूसरी बात, तुम कठोर और खुरदरे ही अच्छे लगते हो। यह शहर की नकली सभ्यता तुन्हें जँचती नहीं है। तुम्हें मेरे साथ नकली सभ्यता से बात करने की जरुरत नहीं है। तुम्हारी बीबी ने तुम्हारे साथ धोखा किया है ना? तो मुझे तुम अपनी बीबी समझ कर खूब गालियाँ दो। मैं भी तुम्हें आज रात अपना पति समझ कर खूब गालियाँ दूंगी। इससे हमारा मन भी हल्का हो जाएगा।”

मेरी बातों से मनीष भी उत्तेजित हो गया। मेरी बाँहें पकड़ कर उन्हें हिलाते हुए बोला, “साली राँड़, मैं तुम्हें वेश्या नहीं समझता। तू वेश्या ही है। वरना क्यों मेरे भाई से चुदवाती? शादी मुझसे और चुदाई मेरे भाई से?”

मैंने मनीष की और ऊपर देखा और बोली, “साले भड़वे, तू अपनी बीबी को क्या समझता है? क्या मैं तेरी रखैल हूँ, की तू जब चाहे मुझे आकर चोद कर चला जाए और बाहर जा कर दूसरी औरत को चोदता रहे? साले तुझे अपने लण्ड के अलावा कुछ और दिखता है?”

मैंने बात बात में मनीष को कह दिया की मैं उस रात उससे ना सिर्फ चुदवाना चाहती थी बल्कि मैं चाहती थी की वह मेरे साथ एक बाजारू औरत या एक रंडी की तरह बरते, क्यूंकि मैं ऐसा करने पर मैं ज्यादा ही गरम हो जाती हूँ और मेरी रगों में मेरे हॉर्मोन बड़ी फुर्ती से दौड़ने लगते हैं।

यह एपिसोड तो संपत हो गया, पर आज आपके लिए पेश है सनडे डबल धमाल का, जिसमे पढ़िए एक नहीं दो दो एपिसोड, अगला एपिसोड अब से कुछ ही देर में,

उम्मीद है आपको मेरी कहानी पसन्द आयी होगी। अपने सुझाव, शिकायते, प्यार मुझे मेल करते रहें।

KyaKhabar32@gmail.com

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