Hawasnama: Sulagti Choot Ke Karnam- Part 4 हवसनामा: सुलगती चूत के कारनामे -4

By | March 10, 2019

Hawasnama Sulagti Choot Ke Karnam

Hawasnama: Sulagti Choot Ke Karnam- Part-1

दोस्तो, मैं पारुल … मैंने अपनी कहानी के पिछले हिस्से में बताया था कि किस तरह मैंने जुगाड़ बना कर दो लोगों से एकसाथ बेहद आक्रामक संभोग किया था लेकिन फिर श्यामा मुलुक(देश, गाँव, मुल्क) चला गया था तो मैं तरस के रह गयी थी।

इमरान से मेरी पहचान अंतर्वासना के जरिये ही हुई थी। फिर हममें अच्छी दोस्ती हो गयी… सो मैंने उन्हें अपनी कहानी और अपनी बेबसी बताई थी लेकिन दिल्ली और लखनऊ के बीच बहुत फासला है। वे चाह कर भी मेरी वैसी मदद नहीं कर सकते थे तो अंतर्वासना पे ही दूसरे तरीके से मेरी हेल्प करने की कोशिश की… कि दिल्ली सब-अर्ब से कोई ऐसा जुगाड़ हो जाये जो कम से कम कभी कभार ही मेरी प्यास बुझा दे… लेकिन अफसोस कि उनकी यह कोशिश रंग न लाई। लोग तो कई मिले लेकिन फौरी तौर पर कोई व्यवस्था न हुई।

उन्होंने अपने आसपास ही नजर दौड़ाने को कहा तो मुझे अपने पति के चचेरे भाई का बेटा हर्ष याद आया जो जनवरी के पहले हफ्ते में ही दिल्ली आने वाला था। वैसे वे लोग सूरत में रहते हैं लेकिन अक्सर किसी न किसी काम से वह दिल्ली आते रहता है और यहां आता है तो हमारे यहां ही ठहरता है। हालाँकि वह अभी अट्ठरह साल का ताजा-ताजा जवान हुआ लड़का था। जो आम हालात में शायद मेरे लिये बेटे जैसा ही मान्य होता लेकिन जो मेरी स्थिति थी उसमें वह मुझे मर्द से बढ़ कर और कुछ नहीं नजर आता था।

इमरान जी ने कहा- फिर उसी पे फोकस करो.
मैं डर रही थी कि नया लड़का है, बात बिगड़ी तो मैं कहीं की न रहूँगी.
लेकिन उन्होंने मुझे भरोसा दिलाया कि ऐसा कुछ नहीं होगा और उन्होंने मुझे कई टिप्स दिये जिससे मैं उसके मनोभावों को परख सकती थी कि वह भी बजाय चाची आंटी के एक औरत के तौर पर मुझमें कोई दिलचस्पी लेता है या नहीं। बहरहाल हमने अलग-अलग परिस्थितियों के हिसाब से प्लान तैयार कर लिया कि कैसे उसे हैंडल करना है।

वह भले ताजा-ताजा जवान हुआ लौंडा था लेकिन मुझे उसके हावभाव से लगता नहीं था कि उसने पहले कभी कुछ किया हो और यही मेरे डर की बड़ी वजह थी लेकिन इमरान जी के प्रोत्साहन के कारण मैंने ठान लिया था कि मैं ट्राई जरूर करूंगी; चाहे जो अंजाम हो।

वह शुक्रवार रात आया. पहले मैंने तय किया था कि रात ही उसे आइसक्रीम खिलाने के बहाने ऑटो से ले जाऊँगी। इस बीच बिना ब्रा के ब्लाउज पहनूंगी और ऑटो में उससे इतने सट कर बैठूंगी कि उसे मम्मों के स्पर्श समेत शरीर की गर्माहट मिलती रहे; साथ ही उसकी जांघ पर भी हाथ फेरूंगी कि उसका लंड खड़ा हो और मैं उसके खड़े होने पर बहाने-बहाने बात कर सकूँ।

लेकिन यह प्लान तब धरा रह गया जब ससुर जी उसे साथ ले के कहीं चले गये. लेकिन फिर भी इतना तो हो गया कि मैंने उसे क्लीवेज दिखाई, नितंबों की थिरकन दिखाई और लगातार उसके लंड को इस तरह घूरती भी रही कि उसे अहसास हो जाये कि मैं क्या देख रही हूँ।
उसके लंड का कड़ापन मुझे यह मैसेज दे गया कि वह भी उन क्षणों में एक औरत को देख रहा था न कि चाची को। दोनों का इंटेंशन क्लियर हो गया तो मैं मौका देख कर उसे यह संदेश भी देने में कामयाब हो गयी कि कल सुबह जब जाना तो दोपहर आने से पहले मुझे फोन कर लेना, कुछ बात करनी है।
उसने भी हामी भर दी थी।
एक तरह से यह भी ग्रीन सिग्नल था.

दलअसल जिस बिल्डिंग में हम रहते थे, उसी में दो फ्लोर ऊपर एक ऐसा फ्लैट था, जिसमें हमारे ही ससुराली रिश्तेदार रहते थे लेकिन नौकरी के चलते वह दो साल से आउट ऑफ कंट्री रह रहे थे. उस फ्लैट की चाबी हमारे यहां रहती थी जो मैंने हासिल कर ली थी और उसके आने से पहले ही वहां जा के थोड़ी सफाई कर ली थी. मैंने बियर-वोडका का प्रबंध कर लिया था और अपनी एक सफेद साटन की लगभग पारदर्शी और बेहद सेक्सी नाईटी रख ली थी कि उसे पहन कर उसका स्वागत करूँगी।

अगले दिन यानि शनिवार छुट्टी करके सुबह से ही मैंने तैयारी कर ली. बाल वाल साफ करके चूत सफाचट चिकनी कर ली थी और दोपहर उसका फोन आने तक बैठ कर पोर्न देखती और सेक्स चैट करती अपनी चूत का तापमान बढ़ाती रही।

लेकिन थोड़ी गड़बड़ फिर हुई. मुझे लगा कि वह आने से पहले फोन करेगा और मैं वहां जाकर तैयार हो जाऊँगी लेकिन उस पगले ने वहां पहुंच कर ही फोन किया।

मैंने सास को पहले ही कह दिया था कि एक दोस्त की बेटी की बर्थडे पार्टी में दो तीन घंटों के लिये जाना है तो उसकी कोई दिक्कत नहीं थी। उस वक्त भी मैंने एक सेक्सी सी साड़ी पहन रखी थी, जिसे नाभि से चार इंच नीचे बांधा हुआ था और बड़े गले का स्लीवलेस ब्लाउज पहना हुआ था।

मैं लपक कर वहां पहुंची तो वह दरवाजे पर खड़ा मिला और देखते ही आंखों में वैसी चमक आ गयी जो मैं देखना चाहती थी। मैंने दरवाजा खोला और हम अंदर आ गये।
” बैठो… क्या पियोगे हर्ष?” मैंने दरवाजा लॉक करते हुए कहा।

उसने शर्माते हुए मना कर दिया और सोफे पर बैठ गया।

“अरे शर्माओ मत यार! मैं किसी से कहने थोड़े जा रही हूँ … मुझे पता है तुम्हें बियर पसंद है। वैसे वोदका भी है … जो कहो।” मैंने उसका हौसला बढ़ाते हुए कहा और किचन से बियर की बोतल और दो गिलास उठा लाई, इस अंदाज में मटक-मटक कर चलते हुए कि वह मेरी गांड को अच्छे से घूर ले।

“जी आंटी … आपको कुछ काम था न?” उसने शर्माते और नजरें चुराते हुए कहा।
“हां, तुम्हें अकेले में सामने बिठा कर देखना था।” मैंने हंसते हुए कहा और उसके सामने इतना झुक कर बियर से एक गिलास भरने लगी कि मेरे दोनों मम्मे उसके चेहरे के सामने आ गये और बेचारा न चाहते हुए भी उसी गहराई में अटक कर रह गया।

इस बीच पल्लू सरक कर हट गया था और मैंने भी उसे संभालने की कोशिश नहीं की। वह क्लीवेज घूरता रहा और मैं उसकी पैंट में बने तंबू को घूरती मुस्कराती रही।
“तुम एंजाय करो.. मैं आती हूँ।”

उसे गिलास थमा कर मैं बाथरूम में आ गयी और अपने सारे कपड़े उतार दिये। थोड़ी डार्क ब्राउन लिपिस्टिक अपने निप्पल्स पे लगाई कि वे ऊपर से साफ नजर आयें और फिर सिर्फ वह सफेद साटन की नाईटी पहन कर बाहर आ गयी जिसमें मुझे देख कर पहले तो हर्ष की आंखें फैलीं, फिर उसने शरमा कर नजरें झुका लीं लेकिन उसकी जींस में बनता तंबू मैं भी महसूस कर सकती थी।

तब तक उसने गिलास खाली कर लिया था।

मैं उसके पास ही उससे सट कर बैठ गयी और उसके मना करने के बावजूद दोनों गिलास भरने लगी। वह झिझक रहा था लेकिन मैं उसे प्रोत्साहित कर रही थी कि अब तुम बच्चे थोड़े हो। बड़े हो गये हो और एक गिलास से क्या होता है. चलो साथ में पीते हैं। मैं किसी को बताऊंगी थोड़ी।
साथ ही उसकी निगाहें भी नोटिस कर रही थी जो मेरे निप्पल्स में अटकी हुई थीं।

“लो पियो, अच्छा तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है क्या?” मैंने उसे गिलास देकर उसके आर्म से अपना एक दूध सटाते हुए कहा।
“आप भी यह क्या पूछ रहे हो आंटी?” वह झिझकते मगर मेरी जांघों को घूरते हुए बोला क्योंकि नाईटी बस घुटनों तक ही थी और मेरे मूवमेंट से वह भी ऊपर तक चढ़ आई थी।
“क्यों … इस उमर में तो सब नार्मल होता है। यंग हो, हैंडसम हो, तुम्हारी तो कई गर्लफ्रेंड्स होनी चाहिये।” मैंने एक हाथ से उसकी जांघ सहलाते हुए कहा।

उसने फिर शरमा कर चेहरा झुका लिया।

“अरे मुझसे मत शरमाओ यार … वैसे भी कल से मुझे घूर-घूर कर देख रहे हो। देखो हर्ष … इन सब बातों से इतर औरत और मर्द के बीच एक अलग रिश्ता होता है जो जिस्मानी होता है। इसमें अलग ही आकर्षण होता है. देखो तुम मुझे ऐसे देखते हो तो मुझे बिल्कुल बुरा नहीं लगता, बल्कि अच्छा ही लगता है। हर औरत यह चाहती है कि कोई उसे इस तरह देखे और नोटिस करे।”

फिर मैं गिलास रख के उसके सामने खड़ी हो गयी।
“शर्माओ मत और मुझे गौर से देखो। कैसी लगती हूँ मैं तुम्हें?” मैंने उसकी आंखों में झांकते हुए कहा।

उसकी हालत अजीब हो गयी, मुंह सूख गया और अजीब अंदाज में मुझे देखने लगा और थोड़ी नर्वसनेस के साथ बोला- आप बहुत खूबसूरत हैं।
“कितनी खूबसूरत … देखो शर्माओ मत यार, तुम कब से मेरे बूब्स देख रहे हो। मुझे कोई ऑब्जेक्शन नहीं … न तुम्हारे देखने में और न करने में। और किसी को यह सब पता भी नहीं चलेगा।” यह बोलते हुए मैं उससे सट कर बैठ गयी।

अब मैंने उसके खड़े लंड पर हाथ रख दिया और उसे सहलाने लगी।
“यह क्या कर रही हो आप.. आंटी … आंटी!” वह सकपकाते हुए बोला और मेरे हाथ को हटाने की कोशिश की, लेकिन मैंने उसके होंठों से होंठ सटा दिये और उसके शब्द गले में ही घुट कर रह गये।

वह एकदम अनाड़ी था, कच्ची कली.. आपकी भाषा में कौला माल। किस तक करना नहीं आता था उसे पर उसका समर्पण भाव महसूस करके मैंने उसके होंठ छोड़े और उसकी गोद में झुक कर पैंट के ऊपर से उसके लंड पर होंठ रगड़ने लगी। उसने अपनी तरफ से तो रोकने की कोशिश की लेकिन मैंने जिप खोल कर और अंडरवियर नीचे खींच कर उसका लिंग बाहर निकाल लिया जो पूरी तरह खड़ा था।

हालाँकि वह कोई बहुत मोटा लंबा तो नहीं था, एक लड़के के हिसाब से सामान्य ही था। मैंने बिना देर किये उसे मुंह में दबोच लिया और चूसने लगी। वह कांपने लगा … उसने मेरा सर पकड़ कर हटाने की कमजोर सी कोशिश की लेकिन फिर समर्पण कर दिया और सोफे की पुश्त से टिक गया।

“अच्छा लग रहा है न?” मैंने चूसने के दौरान पूछा।
“हां आंटी … बहुत अच्छा लग रहा है।” उसने झुरझुरी लेते हुए जवाब दिया।

मैंने उसके हाथ को पकड़ कर अपने बूब पर रख दिया और वह जैसे अनियंत्रित भाव से उसे दबाने लगा और इस बीच मौका देख मैंने एक हाथ से नाईटी के सामने के बटन खोल दिये जिससे उसे आसानी हो गयी, जो उसे हटाने की कोशिश में था। उसने मेरी नाईटी उतार फेंकी और बेताबी से मेरे दोनों मम्मे दबाने लगा और मैंने भी उसकी जींस अंडरवियर समेत ऐसे नीचे धकेली कि उसने बाकी खुद ही पैरों से निकाल दी।
अब ठीक था.

मैंने हलक तक उसके लंड को मुंह में ले लिया और जितनी जोर से वह मेरी चूचियों को दबा रहा था, उतनी ही जोर से मैं उसके लंड को चूस रही थी। फिर मैंने उससे थोड़े शिकायत भरे अंदाज में कहा- यह तो गलत बात है कि तुमने मुझे नंगी कर दिया और खुद नंगे नहीं हुए।
लड़के के सर पर चुदाई का भूत सवार हो चुका था, उसने तुरंत अपनी टीशर्ट उतार फेंकी और मैं अब उठ कर सामने से उससे लिपट कर उसके बदन पर जहां तहां किस करने लगी। उसके निप्पल चुभलाने लगी तो वह बेचैन हो कर मेरे सर को नीचे पुश करने लगा.
चाहती तो मैं भी वही थी, मैं नीचे फर्श पर बैठ गयी और उसके गोटों समेत पहले चूमा फिर लंड को मुंह में लेकर एकदम प्रोफेशनल अंदाज में चूसने लगी। वह खुद भी नीचे से ऐसे कमर उचका रहा था जैसे मुंह चोद रहा हो।

“ओह आंटी … मेरा निकल जायेगा।” थोड़ी देर बाद वह मचलते हुए बोला और मेरे मुंह से लंड निकालने की कोशिश करने लगा।
जबकि मैंने उसकी हालत समझ के उसके चूतड़ों को कस के पकड़ लिया था और जोर से चूसने लगी थी। उसने तड़प कर एकदम से पिचकारी छोड़ दी. साला इतना माल तो पोर्न में भी नहीं देखा था; पूरा मुंह भर गया।
वह झड़ते हुए अजीब-अजीब आवाजें निकाल रहा था और मुझे सारे वीर्य को गटकना पड़ गया।

फिर वह ढीला पड़ गया तो मैं उसे छोड़ बाथरूम भागी और जा कर मुंह और बुरी तरह बहती चूत की सफाई की।
वापस आई तो अजीब से अंदाज में देख रहा था।

“आओ बेडरूम में चलते हैं।” मैंने उसका हाथ पकड़ते हुए कहा और हम दोनों बेडरूम में आ गये जहां मैंने उसे बेड पर गिरा लिया और उसके ऊपर लद कर एक हाथ से उसके मुर्झाये लंड को सहलाते उससे बातें करने लगी।

“सच बताओ, कभी मूठ मारने में इतना मजा आया?”
“नहीं आंटी … कभी नहीं।” उसने शरमाते हुए जवाब दिया।
“अच्छा पता तो होगा सब?”
“नहीं आंटी … मुझे इस सब के बारे में कुछ नहीं पता।” उसने झिझकते अटकते जवाब दिया।

मैं उसे खुले शब्दों के साथ सब बताने लगी। किस चीज को क्या कहते हैं और कैसे-कैसे करते हैं। देखो यह बूब्स हैं, इन्हें दबाया और चूसा जाता है … चूस के देखो। यह बोलकर मैं उससे अपने दूध चुसवाने लगी और वह किसी बच्चे की तरह बारी-बारी दोनों निप्पल्स चूसने लगा। साथ ही मैं उसका लंड सहलाये जा रही थी. फिर उससे दूध छुड़ाये और पांव फैला कर लेट गयी कि चूत खुल कर सामने आ गयी।

“देखो हर्ष … यह चूत होती है जैसे मर्दों का लंड होता है। जानते हो न … यह लंड इस चूत में डालते हैं और फिर इसे जोर जोर से चोदते हैं।” मैंने उसे दिखाते हुए अपनी चूत सहलानी शुरू की।
उसने नदीदों मरभुक्कों की तरह चूत को देखते हुए ‘हां’ में सर हिलाया।

“तो छुओ न इसे … डरो मत, काटेगी थोड़ी! हां ऐसे ही … दो उंगली डाल दो अंदर। हां ऐसे ही … और अंदर बाहर करो।”

“ऐसे आंटी … ऐसे आंटी।” मेरे उकसाने पर उसने दो उंगलियां अंदर घुसा दी और अंदर बाहर करने लगा। मैंने उसका लंड पकड़ लिया और हिलाने लगी।

जब चूत अच्छे से गर्म हो गयी तो उसे खींच कर अपने पास लिटा दिया और ठीक सिक्सटी नाईन की पोजीशन क्रियेट करते उसके मुंह की तरफ चूत करते खुद उसके लंड की तरफ आ कर मुंह में ले लिया और उसे चूसने लगी। मन में कहीं उम्मीद थी कि वह चूत सामने देख के शायद चाटेगा लेकिन हिंदुस्तानी मर्द के लिये यह इतना आसान कहां! और फिर नया लड़का, जो पहली बार चुदाई कर रहा था। वह थोड़ी देर घूरता रहा होगा फिर उंगली से चूत सहलाने और चोदन करने लगा।

उसके लंड को एकदम लकड़ी होते देर न लगी. यहां तो वैसे ही तरसी हुई चूत में आग लगी हुई थी। डर लगा कि नया लड़का है, कहीं उतावलेपन में फिर जल्दी न झड़ जाये तो यह सोच कर उठ गयी और नीचे हो कर उसके लंड को चूत से सटाया और उस पर बैठती चली गयी। एकदम गीली चूत थी और लंड भी गीला. जड़ तक घुसता चला गया।

आह … कितना अच्छा लगा था। ऐसा लगा जैसे पागल न हो जाऊं। इतनी ज्यादा तरसी हुई और गर्म थी कि तीन मिनट ही में झड़ गयी और सारा जूस उसके लंड पर बह गया, लेकिन हटने का तो सवाल ही नहीं था। मैं वैसे ही जोर जोर से सिसकारते हुए ऊपर नीचे होते रही। उसके हाथ मैंने अपने बूब्स पर रख दिये थे, जिन्हें वह जोर-जोर से दबाये जा रहा था।

फिर उसका पारा भी चढ़ने लगा और कमर उचका-उचका कर नीचे से धक्के मारने लगा। पूरा कमरा ‘फचाफच-गचागच’ की मधुर कर्मप्रिय आवाजों से गूँज रहा था और बेड हिल रहा था।

“मेरा निकलने वाला है।” सहसा वह जोर से चिल्लाया।

और अब मैंने भी जोर से भींचना और उछलना शूरू कर दिया। वह फिर अकड़ गया और उसका लंड चूत के अंदर गर्म पिचकारियां छोड़ने लगा, जो मैं महसूस कर सकती थी। मैंने रुकने की कोशिश नहीं की और मैं तब तक उसके लंड पर उछलती रही, जब तक वह लूज हो कर पुल्ल से बाहर नहीं आ गया।

वह ठंडा और शिथिल पड़ चुका था.. मैंने उसके गीले लंड को पोंछा और खुद उठ कर बाथरूम चली आई, जहां फिर से मैंने अपनी सफाई की।

वापस आई तो हर्ष मुझे यूँ ताक रहा था जैसे अपनी प्रेमिका को देख रहा हो। मैं उसके पास चिपक कर लेट गयी और उसके ठंडे पड़े लंड को सहलाने लगी. लेकिन कम उम्र के अपरिपक्व लड़कों के साथ यही दिक्कत कि उन्हें अंतरंगता मिली तो वे लग गये फौरन प्यार करने। हर्ष ने भी वही गाना बजाना शुरू कर दिया जो मुझे सबसे इरिटेटिंग लगता है। मैंने समझाया कि यह बस आकर्षण है, प्यार नहीं। यह रिश्ता हम दोनों की शारीरिक जरूरत को पूरा करने का एक अस्थाई माध्यम भर है.
लेकिन वह रोने लगा।

बड़ी मुश्किल से मैंने उसे चुप करवाया और लगातार समझाने की कोशिश करती रही कि इस उम्र में ऐसा आकर्षण सहज स्वाभाविक प्रतिक्रिया है, इसमें ज्यादा ध्यान देने की जरूरत नहीं। मेरे लगातार नकार ने शायद उसमें झुंझलाहट पैदा कर दी. किसी हद तक गुस्से में वह मेरे मम्मे मसलने लगा, निप्पल्स जोर-जोर से चूसने लगा और इस बार बिना किसी खास कोशिश के उसका लंड भी खुद से ही टाईट हो गया।

इस बार वह मर्द बना और खुद पहल की. मुझे चित लिटा कर मेरी टांगें खोलीं और चूत से सटा कर लंड अंदर पेल दिया। इस बार चूँकि लंड गीला नहीं था तो गीली होने के बावजूद चूत चरमया गयी और लंड आधे पर ही फंस गया लेकिन चार पांच धक्कों में जड़ तक पहुंच गया।

आह … यही तो चाहती थी मैं। कितना खूबसूरत अहसास होता है जब एक कठोर गर्म लंड आपकी चूत में गहरे तक धंस कर उसकी खुदाई कर रहा हो। इस आनंद को बयान कर पाना मुश्किल है. दिल करता है यह अनंत तक चलता रहे। बस यूँ ही वह मर्द बना, मुझ पर छाया मुझे भचीड़-भचीड़ कर गचागच चोदता रहे और मैं सिसकार-सिसकार कर उसका हौसला बढ़ाते, नीचे से कमर उचका-उचका कर चुदवाती रहूं।

और काश … यह सिलसिला कभी न थमे।

लेकिन कभी तो थमना ही था. भले इस बार वह कहीं न कहीं गुस्से में था तो उसकी उत्तेजना बंटी हुई थी और चूँकि दो बार झड़ चुका था तो लंबा चलना ही था। इस बीच मैं भी चर्मोत्कर्ष पर पहुंच कर अकड़ गयी और झड़ कर बह गयी। फिर उसके थोड़ी देर बाद वह भी जोर से कराहता हुआ मेरे शरीर पर ही गिर गया और मुझे दबोच कर झड़ने लगा।

हालाँकि मैं अभी और चुदना चाहती थी लेकिन जब झड़ ही गया तो क्या कर सकते थे। थोड़ी देर मेरे ऊपर पड़ा रहने के बाद उठ कर बाथरूम चला गया और नहा धो कर फिर तैयार हो गया. जबकि मैं इस उम्मीद में नंगी पड़ी उसे तक रही थी कि नंगी औरत देख कर फिर उसकी चुदास भड़केगी। नया लड़का था, पांच बार तक तो चोद ही सकता था; लेकिन इस मरहले पर वह बेकार साबित हुआ।

उल्टे फिर मेरे पास बैठ कर वही इरिटेटिंग इश्क की बातें शुरू कर दीं। जैसे तैसे मैंने उसे वहां से खिसकाया और फिर खुद उंगली और हेयर ब्रश के हैंडल से अच्छे से मास्टरबेट किया।

जो कुछ हुआ इसका लगभग इमरान को अंदाजा था और इस पर हमने पहले ही डिस्कशन किया था। पता था कम उम्र के लड़के सरदर्द बन जाते हैं लेकिन मेरी हालत देखते हुए यह मजबूरी थी. मैं एक अदद लंड को बुरी तरह तरस रही थी।

उन्होंने इसी मंच से मेरे लिये हेल्प मांगी थी और जो लोग दिये थे, उनमें भी ज्यादातर बेसब्रे और डरपोक किस्म के ही निकले। वह एक सीधा सिंपल लॉजिक नहीं समझ पाते कि मैं एक शादीशुदा औरत हूँ और कुछ भी हो, मैं अपने विवाहेत्तर सम्बंधों के चलते अपनी निजी जिंदगी और तबाह तो करूँगी नहीं, जो पहले ही ठीक नहीं ही है. पर सवाल सुरक्षा का भी है।

जब तक मैं भरोसा कर न लूं, मैं किसी कीमत पर अपनी कैसी भी पहचान जाहिर न करूँगी। आपको ठीक नहीं लगता तो बेशक मुझसे परहेज कीजिये। मेरे लिये मेरी सेफ्टी पहले है। बाकी किसी मर्द की गुंजाइश अब भी है लेकिन वह दिल्ली से ही हो तो बेहतर है. और मैं खुद को तभी जाहिर करूँगी, जब मुझे आप पर भरोसा हो जायेगा। बाकी मेरी कहानी अब यहीं खत्म होती है।

समाप्त

दोस्तों आपको मेरी चुदाई की कहानी कैसी लगी मुझे मेल करके बताये और सुझाव भी दे ! अगर आप अपनी कहानी Submit करना चाहते है तो मेल कर सकते है-Kyakhabar32@gmail.com

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